बेफिक्र
कितने खुशनसीब हैं वो
बदनसीबी में पैदा होकर
मुफलिसी की
यतीमो जैसी जिन्दगी जीने वाले ,
झूठा दौना भी मिला तो
नसीब ही समझ लिया
जो भी चिपका था उसमें
चाट कर उदर भर लिया
समाज को देखा तो जरूर
पर सबक उनसे न लिया
भोंहे चढाकर किसी ने देखा
तो उसका सबब समझ लिया ,
कब तक जिओगे ऐसे
बेदाग़ रहने वालो
दाग तो एक दिन लगेगा ही
मौत को गले लगाने वालो !!
कान्ति प्रकाश चौहान